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नाक पर टेनिस बॉल की तरह लटक गया मरीज का दिमाग, फटी रह गईं डॉक्टर्स की आंखें

नाक पर लटक गया दिमागबेहद अलग किस्म की बीमारी डॉक्टरों ने तब देखी जब केरल के मणिकंदन का सामना डॉक्टर से हुआ। एन्सेफैलोसेल (encephalocele) नामक जन्मजात बीमारी से पीड़ित मणिकंदन के जन्म से ही उनकी खोपड़ी में एक सुराख सा छोड़ दिया था, जोकि उम्र के साथ साथ बढ़ता गया। बढ़ते बढ़ते इसका आकार एक टेनिस बॉल के बराबर हो गया था।

नाक पर लटक गया दिमाग

गरीबी व तंगहाली से जूझ रहे मणिकंदन के परिवार के लिए इसका महंगा इलाज करा पाना नामुमकिन था, जोकि मजदूरी करके पेट भरते हैं। खोपड़ी में सुराख के चलते उनके दिमाग का एक हिस्सा नाक और आंख के बीच वाली जगह से बाहर आने लगा और एक ट्यूमर की तरह लटक गया था। इसके चलते मणिकंदन को देखने में भी दिक्कत आने लगी थी, स्कूल के बच्चे उनसे दूर भागते थे।

इस बीमारी के कारण चेहरा वीभत्स लगने लगा था। फिर सरकार से मदद मिली जिसमें पलक्कड़ (मणिकंदन का जिला) प्रशासन और आदिवासी विभाग ने मिल कर इलाज के लिए पैसे जुटाए जिससे कोच्ची के एक  निजी अस्पताल में सर्जरी संभव हो सका।

एन्सेफैलोसेल (encephalocel) एक ऐसी बीमारी है, जिसमे जब बच्चा मां के गर्भ में आकार ले रहा होती है, तो तीसरे से चौथे हफ्ते के बीच कुछ न्यूरल ट्यूब मिलकर दिमाग और रीढ़ की हड्डी बनती हैं। ऐसे 5000 में से एक मामले में न्यूरल ट्यूब पूरी तरह से बंद नहीं हो पातीं। इससे नाक और आंख के पास (या फिर सिर के पीछे) खोपड़ी की हड्डियां पूरी तरह से जुड़ नहीं पातीं। तब दिमाग का कुछ हिस्सा उस जगह में से बाहर आने लगता है।

जन्म के समय कई बार इस बीमारी का पता नहीं चल पाता। इसमें बढ़ती उम्र के साथ एक गांठ सी बनने लगती है। वैज्ञानिक मानते हैं कि ये एक बीमारी परिवार की वंशावली में चलती है (जेनेटिक बीमारी)। फिलहाल इस बीमारी से बचने का कोई पक्का तरीका नहीं है।