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जानिए श्री कृष्ण की मृत्यु का रहस्य, पूरे वंश का हो गया था नाश

भगवान कृष्णजब-जब पृथ्वी पर पाप फैला है. उस पाप का नाश करने के लिए भगवान विष्णु ने अवतार लिया है. विष्णु जी ने कई अवतार लिए हैं. इनमें से एक भगवान कृष्ण भी हैं, जो अधर्म का नाश करने के लिए अवतरित हुए थे.

श्री कृष्ण को भगवान विष्णु का संपूर्ण अवतार कहा जाता है. कृष्ण 64 कलाओं के स्वामी माने जाते हैं. कृष्ण के जन्म के रहस्य को सभी जानते हैं लेकिन क्या आपको पता है कि कृष्ण की मृत्यु कैसे हुई. किस तरह उनके पूरे यदुवंश का विनाश हुआ. कृष्ण की मृत्यु का कारण बहुत ही हैरान करने वाला है.

श्री विष्णु के 10 अवतार इस पृथ्वी पर आ चुके हैं. इनमें मत्स्य अवतार, कूर्म अवतार, मोहिनी अवतार, वराहावतार, नरसिंहावतार, वामन् अवतार, परशुराम अवतार, राम अवतार, कृष्णावतार, यह विष्णु का आखिरी अवतार था, जो पृथ्वी पर अवतरित हुआ.

ब्रह्मपुराण के अनुसार भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी में अट्ठाइसवें युग में देवकी के पुत्र श्रीकृष्ण उत्पन्न हुए थे और इसे ही जन्माष्टमी के रूप में मनाया जाता है.

कृष्ण की मृत्यु का कारण

कृष्ण की मृत्यु और यदुवंश के विनाश का कारण बना कौरवों की मां गांधारी का वह श्राप, जो उन्होंने महाभारत के युद्ध के बाद श्री कृष्ण को दिया था. गांधारी ने महाभारत के युद्ध के लिए श्री कृष्ण को दोषी ठहराते हुए कहा था- जिस प्रकार कौरवों के वंश का नाश हुआ है ठीक उसी प्रकार यदुवंश का भी नाश होगा.

गांधारी के श्राप ने अपना काम किया.

श्रीकृष्ण जब द्वारिका लौटे तो वे यदुवंशियों को लेकर प्रभास क्षेत्र में पहुंचे लेकिन कुछ दिनों बाद महाभारत-युद्ध की चर्चा के प्रभाव ने अपना काम किया और सात्यकि और कृतवर्मा में दोनों झगड़ पड़े.

सात्यकि ने कृतवर्मा का सिर काटा. इसके बाद युद्ध शुरू हो गया. सभी अलग-अलग समूहों में विभाजित होकर एक-दूसरे को मारने लगे. इसी इस लड़ाई में श्रीकृष्ण के पुत्र प्रद्युम्न और मित्र सात्यकि समेत सभी यदुवंशी मारे गए थे, केवल बब्रु और दारूक ही बचे रह गए थे. इस तरह यदुवंश का नाश हो गया.

यदुवंश के नाश से कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी ने भी देह त्याग दी. उसके बाद एक दिन श्रीकृष्ण पीपल के नीचे ध्यान की मुद्रा में थे, तब जरा नाम के बहेलिये ने जो वहां हिरण के शिकार के लिए आया था, श्रीकृष्ण के पैरों के तलवों को हिरण का मुख समझ कर तीर चला दिया. तीर श्रीकृष्ण के तलवे में जाकर लगा.

इसके बाद जरा को बहुत पश्चाताप हुआ और उसने जब क्षमायाचना की तो श्रीकृष्ण ने बहेलिए से कहा कि तूने वही काम किया है, जो विधि में नियत था. अब तू मेरी आज्ञा से स्वर्गलोक प्राप्त करेगा.

श्रीमद भागवत पुराण के अनुसार श्रीकृष्ण और बलराम की देह समाप्त हो जाने के बाद उनके प्रियजनों ने दुख से प्राण त्याग दिए. देवकी, रोहिणी, वसुदेव, बलरामजी की पत्नियां, श्रीकृष्ण की सभी पत्नियां आदि सभी ने देह का त्याग कर दिया और इस तरह से पूरे वंश का नाश हो गया.