Tuesday , June 25 2019

छत्तीसगढ़ विधानसभा में हंगामे के बीच प्रश्नकाल स्थगित, विपक्षी सदस्य निलंबित

छत्तीसगढ़ विधानसभारायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन बुधवार को भी सदन विपक्ष की हंगामे की भेंट चढ़ा। नारेबाजी करते हुए विपक्ष के सभी सदस्य गर्भगृह में प्रवेश कर गए और वहीं बैठकर धरना दिया। विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने छत्तीसगढ़ विधानसभा की नियमावली के तहत गर्भगृह में प्रवेश के कारण सभी के स्वमेव निलंबित होने की बात कही। इस बीच सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।  

प्रश्नकाल शुरू होते ही कांग्रेस से कोंटा विधायक कवासी लखमा ने मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के मुद्दे को उठाया। आदिवासियों की जमीन का मामला उठाया। रिसॉर्ट के नाम पर जमीन पर कब्जा करने के मामले में स्थगन पर चर्चा कराये जाने की मांग की।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि ये समय प्रश्नकाल का है, प्रश्नकाल में इस विषय को नहीं उठाया जाए। इसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी।

विधायक धनेंद्र साहू ने कहा कि महत्वपूर्ण विषय है, चर्चा होनी चाहिए। विपक्ष ने विधायक साहू की बातों का समर्थन करते हुए फिर से नारेबाजी की। इस बीच 11:12 बजे सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित की गई।

कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन कांग्रेस के सदस्यों ने फिर उक्त मामले को लेकर हल्ला बोला।

संसदीय कार्यमंत्री अजय चंद्राकर ने कहा, “प्रश्नकाल में ये मामला नहीं उठाया जा सकता। विपक्ष का ये रवैया लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है। पहले दिन भी किसानों की आत्महत्या के मामले में विपक्ष ने चर्चा की मांग की।”

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आसंदी ने अनुमति दी और चर्चा भी हुई, लेकिन विपक्ष ने चर्चा भी नहीं चलने दी और हंगामा शुरू कर दिया।

मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय ने कहा कि सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है, लेकिन विपक्ष आगामी चुनाव को दृष्टिगत रखते हुए केवल राजनीति के लिए इस मुद्दे को उठाने की कोशिश कर रहा है।

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कांग्रेस के विधायक भूपेश बघेल ने कहा, “ये सरकार की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। हम कैसे अपनी बात नहीं रखें। जब सरकार पर विश्वास ही नहीं है, तो उस सरकार से हम क्या सवाल पूछेंगे।”

आसंदी ने विपक्ष से आग्रह किया कि प्रश्नकाल बाधित न किया जाए। इसके बाद भी सत्तापक्ष-विपक्ष के विधायकों के बीच जमकर तकरार होती रही। आसंदी ने पुन: पक्ष-विपक्ष के सदस्यों से आग्रह किया कि दोनों ही दल प्रश्नकाल की गंभीरता को समझे इसका सम्मान करें।

देखते ही देखते विपक्ष से नेता प्रतिपक्ष टी. एस. सिंहदेव, भूपेश बघेल सहित सभी सदस्य गर्भगृह में प्रवेश किए और नियम के तहत स्वमेव निलंबित हो गए। गर्भगृह में सभी बैठ गए और नारेबाजी शुरू की और चर्चा की मांग करते रहे।

मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने कहा, “सरकार चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अभी प्रश्नकाल का समय है। प्रश्नकाल के बाद आसंदी से अनुमति मिलने पर चर्चा जरूर होगी। यदि विपक्ष मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पर आरोप लगा रहा है या उनके विषय में बोल रहा है तो उन्हें इसकी सूचना नियमानुसार 24 घंटे पूर्व सदन को देनी चाहिए। प्रश्नकाल बाधित हो रहा है।”

नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि ये आदिवासियों की जमीन का मामला है, इसमें आश्वासन मिलना चाहिए।

सत्ता पक्ष से शांत रहने की बात पर नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस के विधायकों को संभालना मेरे बस में नहीं है। जिसपर मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय और भाजपा विधायक शिवरतन शर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा कि तो फिर कांग्रेस विधायक दल के नेता का निर्वाचन फिर से हो। इतना सुनते ही कांग्रेस के सभी सदस्य तमतमा कर गर्भगृह में खड़े हुए। कुछ शांत हुए लेकिन फिर नोंक-झोंक शुरू हुई।

इस बीच कांग्रेस से निष्कासित विधायक अमित जोगी ने सदन में प्रवेश किया। प्रवेश करते ही अपने स्थान पर खड़े होकर उन्होंने कहा, “प्रश्नकाल में विधायकों को अपने क्षेत्र से जुड़े प्रश्नों के माध्यम से बात रखने और सवाल करने का मौका मिलता है। प्रश्नकाल में व्यवधान होगा तो कैसे हम प्रश्न कर सकेंगे। कांग्रेस प्रश्नकाल को बाधित कर रही है। मुद्दों पर सरकार को घेरने में विफल कांग्रेस उचित ढंग से जनता की बातों को नहीं रख पा रही है।” इस बीच पुन: नोक-झोंक शुरू हुई और प्रश्नकाल का समय भी समाप्त हो गया।

विधानसभा अध्यक्ष ने 12 बजे पत्रों को पटल पर रखे जाने की घोषणा की और निलंबित विधायकों से बाहर जाने का आग्रह किया, लेकिन विपक्ष चर्चा की मांग पर हंगामा करता रहा। इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही पुन: स्थगित करने की घोषणा की।

विपक्ष के सदस्यों ने बहिर्गमन कर विधानसभा परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रतिमा के समक्ष धरना दिया। सदन की कार्यवाही पौने एक बजे तक स्थगित रही। 1: 08 बजे कार्यवाही पुन: शुरू हुई और विधानसभा अध्यक्ष ने विपक्ष का निलंबन समाप्त कर कार्यवाही में हिस्सा लेने सदन में आमंत्रित किया, लेकिन ध्यानाकर्षण के बीच फिर से हंगामा होने से ध्यानाकर्षण की कार्यवाही डेढ़ बजे तक नहीं हो सकी।